The draft e-commerce policy

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The draft e-commerce policy

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की एक टास्क फोर्स ने इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स पर राष्ट्रीय नीति का मसौदा पेश किया है, जिसका अध्ययन अब केंद्रीय वाणिज्य, उद्योग और नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में 70 सदस्यीय थिंक टैंक द्वारा किया जाएगा. भारत का ई-टेल व्यवसाय की कीमत लगभग 25 बिलियन डॉलर है, आने वाले समय में इसके 200 बिलियन डॉलर के होने की उम्मीद है.

A Task Force of the Union Commerce Ministry has drafted the National Policy on Electronic Commerce, which will now be studied by the 70-member Think Tank under the chairmanship of Union Commerce, Industry and Civil Aviation Minister Suresh Prabhu. India's e-tail business is worth approximately $ 25 billion, and it is expected to be worth $ 200 billion in the coming time.

ड्राफ्ट नीति में पूरे उद्योग की देखरेख के लिए एक राष्ट्रीय नियामक के निर्माण का प्रस्ताव है, हालांकि इसके लिए मौजूदा कानून और नियम पुस्तिकाओं में संशोधन की भी आवश्यकता होगी. संभावित धोखाधड़ी से ऑनलाइन दुकानदारों की रक्षा और उपभोक्ता संरक्षण एक चुनौती है. 2017-18 में उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की हेल्पलाइन पर 50,000 से अधिक ई-कॉमर्स शिकायतें की गईं. पारंपरिक खुदरा विक्रेताओं ने भी बड़े ई- टेल प्रतिस्पर्धियों के बारे में चिंता जताई है, वे एक प्लेटफार्म चाहते हैं जहाँ नियम स्पष्ट हों.

In draft policy, there is a proposal to create a single national regulator for overseeing the entire industry, although it will also require amendment in the existing law and rule booklets. Protecting online shoppers from possible fraud and consumer protection is a challenge. More than 50,000 e-commerce complaints were made in the Ministry of Consumer Affairs's helpline in 2017-18. Traditional retailers have also expressed concern about big e-tail competitors, they want a platform where the rules are clear.

बड़े प्रतिस्पर्धियों को अनुचित प्रथाओं के माध्यम से प्रतियोगिता के मूल्य निर्धारण से रोकना होगा, लेकिन बहुत अधिक लाइसेंस और मूल्य नियंत्रण इस क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं. प्रस्तावित ई-कॉमर्स नीति इस बात का ध्यान रखना होगा कि ऑनलाइन रिटेल में बड़े पैमाने पर निवेश की योजनाओं पर प्रभाव न पड़े, अन्यथा इससे रोज़गार सृजित करने और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने का अवसर खो जाएगा.

Large competitors will have to stop the competition from pricing through inappropriate practices, but much more license and value control can affect this area. The proposed e-commerce policy should be kept in mind that large scale investment plans in online retail will not be affected, otherwise it will lose opportunity to generate employment and benefit consumers.

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