Satan of defection

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Satan of defection

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्यसभा चुनावों के लिए NOTA (उपरोक्त में से कोई नहीं) विकल्प का इस्तेमाल करने को लेकर कहा कि यह दलबदल के दोषों को वापस लाएगा. यह विकल्प केवल सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार और प्रत्यक्ष चुनावों के लिए है न कि चुनावों के द्वारा आयोजित राज्यसभा की आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली एकल हस्तांतरणीय मत के लिए है.

The Supreme Court on Tuesday asked to use the NOTA (none of the above) option for the Rajya Sabha elections, that it will bring Satan of defections. This option is only for universal adult franchise and direct elections, not the proportionate representation of the Rajya Sabha organized by the elections, for the single transferable vote.

चीफ जस्टिस मिश्रा ने निर्णय अवलोकन कर कहा, "नोटा का विकल्प प्रत्यक्ष चुनावों में एक अमृत के रूप में काम कर सकता है, लेकिन राज्यों की परिषद के चुनाव में, यह न केवल लोकतंत्र को कमजोर करेगा, बल्कि दलबदल और भ्रष्टाचार को बढ़ाएगा.

Chief Justice Mishra said, "The option of the nota can act as a nectar in the direct elections, but in the elections of the Council of States, it will not only undermine democracy but will also increase defection and corruption

अदालत ने कहा कि राज्यसभा चुनावों में मतदान में व्हिप की आज्ञा का पालन करने के लिए निर्वाचक बाध्य है. पार्टी का अनुशासन का इस तरह के चुनाव में अत्यधिक महत्व है, क्योंकि यह पार्टियों के अस्तित्व का आधार है. यह संसदीय लोकतंत्र में आवश्यक है. क्रॉस-वोटिंग और भ्रष्टाचार का विचार अप्रिय है.

The court said that electorate is obliged to follow the whip command in the elections in the Rajya Sabha elections. Such discipline of party discipline is of utmost importance, because it is the basis of the existence of parties. It is necessary in parliamentary democracy. The idea of ​​cross-voting and corruption is unpleasant.

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