Higher Education Commission of India (HECI) Bill

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Higher Education Commission of India

Higher Education Commission of India

सभी हितधारकों को भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम के निरसन) विधेयक, 2018 के सुझावों के लिए आमंत्रित किया गया है। यदि विधेयक संसद द्वारा पारित किया जाता है, तो यह उच्च शिक्षा क्षेत्र के शैक्षिक और वित्त पोषण पहलुओं को अलग करेगा।

The Center has decided to establish the Indian Higher Education Commission (HECI) in place of the University Grants Commission (UGC). All stakeholders have been invited for suggestions to the Higher Education Commission of India (Repeal of University Grants Commission Act) Bill, 2018. If the bill is passed by Parliament, then it will separate the educational and funding aspects of the higher education sector.

केंद्र ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के स्थान पर भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (HECI) स्थापित करने का निर्णय लिया है। सभी हितधारकों को भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम के निरसन) विधेयक, 2018 के सुझावों के लिए आमंत्रित किया गया है। यदि विधेयक संसद द्वारा पारित किया जाता है, तो यह उच्च शिक्षा क्षेत्र के शैक्षिक और वित्त पोषण पहलुओं को अलग करेगा।

So far, the UGC pays its institutions from the central fund, but there will be no financial powers of the HECI. Finance will be taken care of by the Union Human Resource Development Ministry. At the same time, it will not inspect from time to time to assess financial needs or standards of education like UGC, but will set norms on academic performance by higher educational institutions.

अभी तक UGC अपने संस्थानों को केंद्रीय निधि से धन देता है, किन्तु HECI की कोई वित्तीय शक्तियां नहीं होंगी। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा वित्त का ध्यान रखा जाएगा। साथ ही यह UGC की भांति शिक्षा की वित्तीय जरूरतों या मानकों का आकलन करने के लिए समय-समय पर निरीक्षण नही करेगा बल्कि उच्च शैक्षणिक संस्थानों द्वारा अकादमिक प्रदर्शन पर मानदंड स्थापित करेगा

HECI has the right to penalize or stop sub-standard institutions without affecting the interests of the students, if the organization's management does not comply with the penalties, then they can remain in jail for three years. It will have 12 members, including one president, one vice president and academicians and industry members, who will be appointed by the center. Chairperson's retirement age will be 70 years, including a five-year tenure.

HECI को छात्रों के हितों को प्रभावित किए बिना उप-मानक संस्थानों को दंडित या बंद करने का अधिकार है, यदि संगठन का प्रबंधन दंड का पालन नहीं करता है तो वे तीन साल तक जेल में रह सकते हैं। इसमे एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और शिक्षाविदों और उद्योग के सदस्यों सहित 12 सदस्य होंगे, जिन्हें केंद्र द्वारा नियुक्त किया जाएगा। चेयरपर्सन की रिटायरमेंट की उम्र पांच वर्ष के कार्यकाल सहित 70 वर्ष की होगी.

SOURCE:- THE HINDU NEWSPAPER

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