Falling rupee value

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Falling rupee value

इतिहास में पहली बार भारतीय रुपया 14 अगस्त 2018 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 70.07 रुपये के निम्नतम स्तर तक गिर गया. हालांकि, यह बाद में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा हस्तक्षेप के बाद लगभग 69.84 रुपये पर पहुंचा. 2018 में रुपया डाउनस्लाइड पर रहा है और 2018 में 9% फिसल गया है क्योंकि विदेशी निवेशकों ने क्रमशः इक्विटी और ऋण बाजार में 6.8 मिलियन डॉलर और 5.15 बिलियन डॉलर की बिक्री की है।

For the first time in history, the Indian rupee fell to the lowest level of Rs 70.07 against the US dollar on August 14, 2018. However, afterwards, it came after the intervention by Reserve Bank of India (RBI) at approximately Rs 69.84. In 2018, the rupee has been downslide and 9% has slipped in 2018 because foreign investors have sold 6.8 million dollars and 5.15 billion dollars in equities and debt markets respectively.

इसके अलावा, उभरते बाजारों में नए सिरे से बिक्री के लिए तुर्की की मुद्रा का संकट शुरू हो गया है और रुपये में तेजी से गिरावट आई है। तुर्की लीरा में राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं के बाद गिरावट देखने को मिली है। पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले इसमें लगभग 50% की गिरावट आई है। लीरा में हो रही गिरावट का मुख्य कारण राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की सरकार द्वारा खराब आर्थिक प्रबंधन है।

Apart from this, a Turkish currency crisis has started in the emerging markets and the rupee has declined sharply. The Turkish Lira has seen a decline after political and economic problems. In the last year, it has fallen by about 50% compared to the dollar. The main reason for the decline in Lira is poor financial management by the government of President Recep Tayyip Erdogan

इसके गिरने के निहितार्थ हैं..

The implications of its fall are ..

रुपए में गिरावट के कारण, आयातकों (विशेषकर तेल कंपनियों और अन्य आयात-गहन कंपनियों) को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि भारत में माल या पूंजीगत वस्तुओं के आयात की लागत बढ़ जाएगी। डॉलर के बराबर राशि खरीदने के लिए उन्हें अधिक भारतीय रुपये का भुगतान करना होगा।

Due to the rupee fall, importers (especially oil companies and other import-intensive companies) will be the biggest loss, as the cost of imports of goods or capital goods in India will increase. To buy an equivalent amount of dollars they will have to pay more Indian rupees.

निर्यात को कमजोर रुपए से फायदा होता है क्योंकि उन्हें अपने डॉलर निर्यात की कमाई को भारतीय मुद्रा में परिवर्तित करते समय अधिक रुपए मिलते हैं। भारत के सॉफ्टवेयर निर्यातकों को रुपये में गिरावट से लाभ होगा.

Exports can benefit from weak rupees because they get more money while converting their dollar exports into Indian currency. Software exporters of India will benefit from a decline in the rupee.

अर्थव्यवस्था पर प्रभाव देखने पर, इससे आयात महंगा होगा, यह तेल की कीमतों में वृद्धि करेगा (भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं का लगभग 80% बाहर से आयत करता है) जो CAD पर और अधिक दबाव डाल सकता है और मुद्रास्फीति बढ़ने का कारण बन सकता है। मुद्रास्फीति के दबावों से RBI ब्याज दरों में वृद्धि करने के लिए मजबूर कर हो सकता है। यह मेक इन इंडिया एजेंडा का समर्थन करने के लिए दीर्घकालिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को आकर्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है

On seeing the impact on the economy, imports will be expensive, it will increase the oil prices (India is the world's third largest oil importer and approximately 80% of its crude oil needs rectification from outside) which is more pressing on the CAD And can cause inflation to rise. Inflation pressures may cause RBI to compel interest rates to rise. It can also play an important role in attracting long-term FDI (FDI) to support make-in-India agenda.

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